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इन 5 कामों से घर-परिवार और समाज में होता है आपका अपमान - Scripture / Ethology Knowledge

These 5 things in society is the family and insults - Scripture Knowledge

रामायण, महाभारत, गरुड़ पुराण आदि धर्मग्रंथो में कई ऐसे काम बताए गए हैं जो हमें करना नहीं चाहिए। जो लोग वर्जित किए गए काम करते हैं, उन्हें कई प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। यहां जानिए पांच काम ऐसे बताए गए हैं, जिनकी वजह से घर-परिवार और समाज में मान-सम्मान नहीं मिलता है, अपयश यानी अपमान का सामना करना पड़ता है। इसलिए हमेशा इन बातो का ध्यान रखें
These 5 things in society is the family and insults

1. अपनी संतान की अनदेखी करना (Ignoring your child ) :
यदि कोई व्यक्ति संतान के पालन-पोषण में अनदेखी करता है तो संतान बिगड़ जाती है। संतान संस्कारी नहीं है और गलत काम करती है तो इससे अपमान ही प्राप्त होता है। जब घर के बड़ों की अनदेखी होती है तो संतान असंस्कारी हो सकती है। अत: माता-पिता को संतान के अच्छे भविष्य के लिए उचित देखभाल करनी चाहिए। संतान को अच्छे संस्कार मिले इस बात का ध्यान रखना चाहिए।

महाभारत में महाराज धृतराष्ट्र इस बात का श्रेष्ठ उदाहरण है कि संतान संस्कारी नहीं होती है तो पूरे परिवार का भी नाश हो सकता है। दुर्योधन अधर्म के मार्ग पर चल रहा था, लेकिन धृतराष्ट्र ने इस बात पर ध्यान नहीं दिया। परिणाम सामने है। कौरव वंश का नाश हुआ और धृतराष्ट्र को भी अपमान का सामना करना पड़ा।

2. लोभ या लालच करना ( Solicitation or covet ) :
जो लोग धनी हैं, लेकिन घर-परिवार की जरुरतों पर खर्च नहीं करते हैं, धन के लिए लालच करते हैं, उन्हें समाज में सम्मान प्राप्त नहीं हो पाता है। धन को जरूरतों पर भी खर्च न करने या कंजूस होने पर धन की लालसा और अधिक बढ़ती है। इससे व्यक्ति और अधिक पैसा कमाने के लिए गलत काम कर सकता है।
लालच बुरी बला है। ये बात सभी जानते हैं। बड़ी-बड़ी मछलियां भी छोटे से मांस टुकड़े के लालच में फंसकर अपने प्राण गवां देती है। इसी प्रकार इंसान भी धन के लोभ में फंसकर कई परेशानियों का सामना करता है।

3. धन की कमी होने के बाद भी दान करना ( Despite the lack of funds to charity ) 
जो लोग अपनी आय से अधिक खर्च करते हैं, अत्यधिक दान करते हैं, वे कई प्रकार की परेशानियों का सामना करते हैं। आय से अधिक दान करते हैं, आमदनी कम होने या धन अभाव होने पर भी शौक पूरे करना, मौज-मस्ती करना, फिजूलखर्च करना पूरे परिवार को संकट में फंसा सकता है। इस काम से अपमान ही मिलता है।
दान करना चाहिए, लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि बहुत अधिक मात्रा में या अपनी आय से अधिक दान न करें। पुराने समय में राजा हरिशचंद्र का प्रसंग इस बात का उदाहरण है। राजा हरिशचंद्र ने अपनी संपत्ति विश्वामित्र को दान कर दी थी। इस कारण राजा की पत्नी और पुत्र को भी भयंकर परेशानियों का सामना करना पड़ा था।

4. दुष्ट लोगों के साथ रहना ( Staying with the wicked ) :
अच्छी या बुरी संगति का असर हमारे जीवन पर होता है। यदि हमारी संगत गलत लोगों के साथ है तो कुछ समय तो सुख की अनुभूति होगी, लेकिन परिणाम बहुत बुरा हो सकता है। बुरी संगत से बचना चाहिए।
इस बात के कई उदाहरण है, जहां दुष्टों की संगत में लोग बर्बाद हुए हैं। दुर्योधन के साथ कर्ण, रावण के साथ कुंभकर्ण और मेघनाद श्रेष्ठ उदाहरण है। हमें दुष्ट लोगों का साथ छोड़ देना चाहिए।

5. दूसरों का अहित करना ( To harm others ) :
जो लोग स्वयं के स्वार्थ को पूरा करने के लिए दूसरों का अहित करते हैं, वे लोग इस काम के भयंकर फल प्राप्त करते हैं। इस काम से व्यक्ति के साथ ही परिवार को भी नुकसान, अपमान का सामना करना पड़ सकता है।
राजा कंस ने श्रीकृष्ण को मारने के लिए कई प्रयास किए, लेकिन अंत में वह स्वयं ही मृत्यु को प्राप्त हुआ।

शास्त्रों में बताया गया है कि जो व्यक्ति जैसा करेगा, उसे वैसा ही फल प्राप्त होगा। हम अच्छे काम करेंगे तो अच्छा फल मिलेगा और बुरे काम करेंगे तो बुरा।


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