आज जब में क्वोरा पर कुछ देख रहा था तो किसी किताब का एक स्क्रीनशॉट हिंदी में हाथ लगा। जिसे पढ़कर कुछ देर तक सोच में पड़ गया कि -
प्रत्येक सत्य आचरण रखने वाला मनुष्य आर्य ही है? तो क्या प्रभु राम के सत्य आचरण के कारण ही माता सीता उन्हें कभी कभी आर्यपुत्र या आर्य के नाम से सम्बोधित करती थी? तो फिर इसका मतलब क्या आर्य और द्रविड़ की कहानी भी एक भ्रम थी? क्या पता।
अपने जीवन में इतना तो अनुभव हो ही गया है कि जैसे ही आप वेद, पुराण अर्थात शास्त्रों को पढ़ते या सुनते है वैसे एक बड़े अजीव तरह के भ्रम से बाहर निकल आते है, और साथ ही साथ आचरण भी सत्यता को प्राप्त करने लगता है।
इसलिए इस पेज को आप भी पढ़े और समझे कि कैसे एक मनुष्य जो झूठ बोलने से घृणा करता है वह निश्चित ही एक देव आत्मा है, जो अपने परमात्मा की शरण में जाना चाहता है।
अभी भी इसे देखे और बताये कि यह कौन सी पुस्तक है ? या कौन सी वेबसाइट है। हो सकता है ये कुंडली में दी गयी गण या जातियां हो।
Source - Quora
