आध्यात्म के अनुसार जीवन केवल जीना नहीं, बल्कि आत्मा की परीक्षा है। जानिए कैसे यह संसार परीक्षा-हाल की तरह है और कर्म, ज्ञान व साधना मनुष्य के साथ जाते
आज जब यूट्यूब पर किसी ज्ञानी पुरुष के वचनों को सुन रहा था, तो उनसे किसी ने पूछा कि जीवन क्या है. उन्होंने वह उत्तर अपने ज्ञान के अनुरूप दिया, और वो उत्तर भी सही था। लेकिन इस प्रश्न के बारे में मेरे मतिष्क में क्या उत्तर आया, आज में उसे आपके समक्ष प्रकट करता हूँ। अगर आपको कुछ समझ आता है तो कमेंट अवश्य करें।
आप पढ़े-लिखे हैं, और आप विद्यार्थी जीवन में कई बार परीक्षा हाल में बैठे होंगे। और मान लीजिये उसी परीक्षा हाल में कोई आपसे पूछता कि ये कि ये परीक्षा हाल क्या है? तो आप क्या कहते हैं? आप परीक्षा हॉल को कैसे बताते हैं और क्या बताते हैं? कुछ लोग इसके बारे में बता पाते तो कुछ लोग नहीं।
मुझसे कोई पूछता तो में भी यही बताता कि जो मेने साल भर पढाई की है उसका ज्ञान मुझे है या नहीं इस बारे में बताना ही परीक्षा है, और जहाँ बैठकर में ये कार्य कर रहा हूँ वो परीक्षा-हाल है।
ठीक इसी प्रकार कोई मुझसे पूछे कि जीवन क्या है? तब भी मेरा उत्तर यही होता है कि जीवन एक परीक्षा है, और ये संसार परीक्षाहाल है। अब आप कहेंगे ये कैसे संभव है ?
में कहूंगा - मेरे अनुसार ये संभव नहीं बल्कि सत्य है।
मैं 84 लाख योनियों से गुजरकर अलग तरह का अनुभव और ज्ञान समेटकर अब इस परीक्षाहॉल में हूँ। यहाँ मेरे चार पेपर है। जो कि शूद्र, वैश्य, क्षत्रिय और ब्राह्मण जीवन का पेपर देना है। अगर किसी विषय में फ़ेल होता हूँ तो भगवान् 3 मौके और देते हैं। इस प्रकार से 7 बार मनुष्य जन्म अर्थात सात बार पेपर देना है। अगर सात बार में भी ब्राह्मण जन्म तक नहीं पहुँचा तो फिर से 84 लाख योनियों में चक्कर लगाकर यहाँ तक आना होगा।
भगवान् को ब्राह्मण सबसे ज्यादा क्यों प्रिय है ?
जो मनुष्य इतने पेपर पास करके ब्राह्मण जन्म तक आ पता है, उसे सभी शिक्षक अर्थात देवी देवता उसे प्रेम करते है। अगर ये पेपर भी पास कर लिया तो राष्ट्रपति से पुरस्कार अर्थात भगवान् से मोक्ष मिलता है।
मोक्ष किसे कहते है ?
सभी प्रकार की इच्छाओं से पूरी तरह से संतुष्ट रहना, किसी भी प्रकार इच्छा न होना ही मोक्ष है।
परीक्षा पास करने के लिए शर्तें क्या हैं ?
परीक्षा पास करने के लिए यम और नियम है, जिनके माध्यम से व्यक्ति आपने आप साधता है, फिर जब वह साधक बन जाता है। तो वह इस परीक्षा को बड़े आराम से देकर, परीक्षा हाल से हँसते हसते निकल जाता है।
परीक्षा में प्रश्न कैसे होते हैं ?
एक मनुष्य कैसे जीवन में देवता की भांति रह सकता है? उससे जुड़े हुए प्रश्न होते हैं। जो जीवन के अलग-अलग मोड़ पर अलग घटनाओं के रूप में व्यक्ति के सामने आते हैं।
परीक्षाहॉल से निकलते समय क्या शेष रह जाता है ?
जब परीक्षा हाल से निकलते है तो "खाली हाथ आया था, खाली हाथ जायेगा" या "क्या लेकर आये थे, और क्या लेकर जाओगे" जैसे भर्मित करने वाले वचन लागू नहीं होते, बल्कि सनातन सत्य यह है कि आपके कर्म और ज्ञान ये दोनों आपके साथ जायेगे। और ये आगे काम आएंगे।
मान लीजिए अगर आपको किसी कर्मफल के प्रभाव से स्वर्ग मिला तो आप अपने ज्ञान और कर्म के अनुसार एक साधक की भांति रहेंगे तभी तक स्वर्ग में रह पयोगे, नहीं तो आपको राजा नहुष की तरह स्वर्ग से निकाला भी जा सकता है।
मुझे आशा है, शायद कुछ समझ में आया होगा। अगर नहीं या कोई प्रश्न है तो कमेंट के माध्यम से पूछ सकते हैं।
ध्यान दे - सबके अपने अपने विचार होते है और या पोस्ट मेरा स्वयं का विचार है।

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