यदि आप (Chief Election Commissioner) ज्ञानेश कुमार के ऊपर चल रहे विवादों को लेकर कंफ्यूज हैं, तो मैंने उनके बारे में जब आज जाना तो कुछ ऐसा सामने निकल कर आया जो आपको सोचने को मजबूर कर देगा। What I Think Category के माध्यम से आज मैं आपको बताऊंगा कि मैं अब श्री ज्ञानेश कुमार के बारे में क्या सोचता हूँ।
ज्ञानेश कुमार 1988 बैच के केरल कैडर के IAS अधिकारी रहे हैं और वे 19 फरवरी 2025 को भारत के 26वें मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) बने। उन्होंने केंद्र सरकार में सहकारिता मंत्रालय (Ministry of Cooperation) के सचिव, संसदीय कार्य मंत्रालय के सचिव तथा गृह मंत्रालय में वरिष्ठ पदों पर कार्य किया है।
उनकी पहचान एक वरिष्ठ प्रशासक के रूप में है, जिन्होंने गृह मंत्रालय, संसदीय कार्य मंत्रालय, सहकारिता मंत्रालय और चुनाव आयोग जैसे महत्वपूर्ण संस्थानों में शीर्ष स्तर पर कार्य किया है।
जम्मू-कश्मीर से जुड़े प्रशासनिक कार्यों और अनुच्छेद 370 हटाने के बाद की प्रक्रियाओं में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका का उल्लेख कई स्रोतों में मिलता है। इसके अलावा, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के गठन से जुड़ी सरकारी प्रक्रिया में भी उनकी भूमिका रही, और SIR के माध्यम से वोटर लिस्ट से अवैध/विदेशी नामों को हटाने में भी उनका योगदान रहा।
इसलिए मुझे यह लगता है कि देशविरोधी तत्व, राजनीतिक दलों / जातिवादी दलों की आड़ लेकर ऐसे अधिकारियों द्वारा देशहित में किए गए कार्यों को लेकर उन्हें निशाना बनाने की कोशिश कर सकते हैं।
तो देश के लोगों का कर्तव्य है कि ऐसे अधिकारियों की रक्षा अवश्य करें, जो अपने नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करते हैं।
और यही बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर को सच्ची श्रद्धांजलि होगी कि देश के प्रत्येक देशभक्त अधिकारी की रक्षा का कर्तव्य जनता जातिवाद और राजनीति को एक तरफ रखकर अपने वोट से निभाए।
मज़े की बात तो यह है कि जातिगत दलों को लगता है कि वे अपनी राजनीति चमका रहे हैं, जबकि असल में वे जोगिन्दर नाथ मंडल की तरह सिर्फ मोहरे मात्र हैं, जिन्हें या उनकी पीढ़ी को एक झटके में झटके का बना दिया जाएगा।
इसलिए मुझे लगा कि इन घटनाओं और आरोपों पर तो मूर्ख से मूर्ख व्यक्ति भी वही सोचेगा जो मैं सोच रहा हूँ। इसलिए ब्लॉग पोस्ट के माध्यम से अपने विचार व्यक्त कर दिए ।
बाकी कौन सही है और कौन गलत, इसका अंतिम फैसला मैं नहीं बल्कि हमारा संविधान और कानून करेगा।
लेकिन मेरी व्यक्तिगत दृष्टि में, अगर किसी अधिकारी ने देश की एकता, अखंडता (कश्मीर) और संवैधानिक व्यवस्था की रक्षा के लिए काम किया है, तो मेरे लिए वह अधिकारी सम्मान का पात्र है।
इसी नजरिए से देखें तो EC ज्ञानेश कुमार मेरे लिए ‘हीरो’ हैं।
और हाँ एक भाई ने कमेंट में पूछा था कि आपने गोदी मीडिया के बारे में तो बता दिया पालतू मीडिया शब्द जो सोशल मीडिया पर लोग इस्तेमाल करते है, वो क्या है। अगर कभी याद आ गया तो अवश्य उस पर भी अपने विचार व्यक्त करने की कोशिश करूँगा।
तब तक के लिए सभी को राम राम जी। जय हिंद, जय भारत।
Disclaimer - यह जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध स्रोतों पर आधारित है। इस ब्लॉग में दी गई जानकारी मेरे अपने व्यक्तिगत विचार और राय हैं।
