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अच्छे दिन - खुश हो जाओ क्युकी अब सप्ताह में 3 रविवार होंगे?

क्या आपको ये मज़ाक लग  है? दोस्तों ये मजाक नहीं बल्कि बिलकुल सच है। ये बात उन मजदूर संगठनो ने नहीं आपको बताई होगी जो अपने झंडे में लाल कपडे के साथ सितारे रखते है या हरे झंडे में सितारे रखते है क्युकी मजदूर सुखी हो गया तो संगठन ही ख़त्म हो जायेगे। खैर इन्हे छोड़ते है अपने काम की बात देखते है। 

आखिर कैसे आएंगे अच्छे दिन मजदूरों के ?

आपको रोज़ रोज़ ऑफिस या फैक्ट्री जाने की जरुरत नहीं होगी। अब आप सप्ताह में सिर्फ 4 दिन ऑफिस जायेगे। मजदूरों या प्राइवेट नौकरी करने वालो के इतने अच्छे दिन आएंगे ये कभी सोचा नहीं था।  ये सपने जैसा था जिसे मोदी सरकार पूरा करने जा रही है। 

अच्छे दिन -  खुश हो जाओ क्युकी अब सप्ताह में 3 रविवार होंगे?


क्या फायदा होगा मजदूरों या प्राइवेट नौकरी करने वालो  का -

  • 3 दिन की छुट्टी से आप अपने परिवार को समय दे पाएंगे 
  • 3 दिन का आने जाने का खर्चा बचेगा। और आप कही घूमने जा सकते है या आपकी आर्थिक स्थिति सही नहीं है तो आप अपना काम करने के बारे में सोच सकते है। इससे आत्मनिर्भर भारत को बल मिलेगा। 
  • देश में पेट्रोल या डीजल की खपत कम होगी क्युकी आना जाना कम होगा। 
  • सैलरी 7 दिन की ही मिलेगी। 
  • सैलरी में थोड़ी कटौती होगी लेकिन वो पैसा आपके PF में जायेगा, अर्थात कम सैलरी में भी नुकसान नहीं बल्कि फायदा है। 
  • मिनिमम सैलरी के हिसाब से 20000 से कम सैलरी नहीं मिलेगी अगर आप ग्रेजुएशन है।  ये नियम मोदी सरकार पहले ही ला चुकी है। 
  • OSH Code के ड्राफ्ट नियमों में 15 से 30 मिनट के बीच के अतिरिक्त कामकाज को भी 30 मिनट गिनकर ओवरटाइम में शामिल करने का प्रावधान है। मौजूदा नियम में 30 मिनट से कम समय को Overtime योग्य नहीं माना जाता है।
  • किसी भी कर्मचारी से 5 घंटे से ज्यादा लगातार काम कराने को प्रतिबंधित किया गया है। कर्मचारियों को हर पांच घंटे के बाद आधा घंटे का विश्राम देने के निर्देश भी नियमों में शामिल हैं।


कंपनियों और फैक्टरियों को फायदा -

  • कंपनियां या फैक्ट्री बाकि दिन में अगर काम करवाना चाहती है तो अन्य मजदूरों को नौकरी पर रखना होगा, जिससे  बाजार में ज्यादा से ज्यादा नौकरियां निकलेगी। 
  • कंपनियां या फैक्ट्री अपना बिजली या ऑफिस खर्च बचा पायेगी। इससे उनकी प्रोडक्शन या काम करने की क्षमता बढ़ेगी।
  • नए लेबर कोड में नियमों में ये विकल्प भी रखा जाएगा, जिस पर कंपनी और कर्मचारी आपसी सहमति से फैसला ले सकते हैं।
  • रोज़ रोज़ काम करने से मजदूर और कर्मचारी अपना अच्छा परफॉरमेंस नहीं दे पाते क्युकी वो बोर हो जाते है। 


ये फैसला सरकार ने क्यों लिया -

  •  नए नियमों के तहत सरकार ने काम के घंटों 8 घंटे से बढ़ाकर 12 तक करने को शामिल किया है। अब काम करने के घंटों की हफ्ते में अधिकतम सीमा 48 होगी, ऐसे में कामकाजी दिनों का दायरा पांच से घट सकता है। क्युकी सरकार को पता है की ज्यादातर कंपनियां पहले से ही मजदूरों का शोषण कर रही है 8 घंटे की बजाय उनसे 12-14  घंटे काम करवाती है और सैलरी 8 घंटे की ही देती है। 
  • ज्यादातर कंपनियां अपने कर्मचारियों की सैलरी 20000 से ऊपर झूठा दिखाती है लेकिन सैलरी देती है उन्हें  सिर्फ 8000 से 15000 ही है, वो थोड़ा बहुत कॅश देकर वाउचर sign करवाती है सबूत के तौर पर। इसमें CA या अकाउंटेंट की मिली भगत होती है अर्थात ये लोग मजदूरों की मेहनत नहीं खून पीते है। 
  • कुछ कंपनियां उधारी देकर, एडवांस देकर भी cash वाउचर sign करवाती है। लोग नौकरी जाने के डर से sign कर देते है और ये लोग उनकी मेहनत डकार जाते है। 
  • जिन कंपनियों या फैक्टरियों में संगठन / Union काम करते है वहां पर तो हालात और ख़राब होती है क्युकी ज्यादातर संगठन के मुखियां टेबल के नीचे से पैसे लेकर मजदूरों का पैसा खाते है, और रेवड़िया मजदूरों में बांटते है।
  • इसलिए सिर्फ ऐसी फैक्ट्री या कंपनी में काम करे जो सिर्फ अकाउंट में सैलरी ट्रांसफर करती होगी, और कॅश में लेन देन न करती हो। अगर कोई कंपनी या फैक्ट्री कैश में लेन देन करती है तो समझो वो आपका अधिकार कही न कही खा रही है। 

क्या सैलरी कम मिलेगी -

जी हाँ, आपको थोड़ी बहुत सैलरी कम मिलेगी क्युकी सरकार आपका बुढ़ापा बनाने के बारे में भी सोच रही है आपको 1000-2000 रुपये कम हो सकते है जिन्हे आपके PF या पेंशन फण्ड में डाला जायेगा जो आपको बाद में व्याज सहित मिलेगा। अर्थात सोशल मीडिया का एक वर्ग सैलरी कटने के नाम पर आपको भड़का सकता है जो की झूठ है।  मूल वेतन बढ़ने से आपका पीएफ भी बढ़ेगा। जिसका मतलब है कि टेक-होम या हाथ में आने वाला वेतन में कटौती होगी।

रिटायरमेंट की राशि में होगा इजाफा -

ग्रेच्युटी और PF में योगदान बढ़ने से रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली राशि में इजाफा होगा। इससे लोगों को रिटायरमेंट के बाद सुखद जीवन जीने में आसानी होगी

संसद में पास किए गए तीन मजदूरी संहिता विधेयक (कोड ऑन वेजेज बिल)। इन विधेयकों को इस साल 1 अप्रैल से लागू होने की संभावना है।

इस नियम के बारे में अपने विचार कमेंट के माध्यम से जरूर बताये। अगर कोई जानकारी सही नहीं है तो प्रूफ के साथ बताये में उसमे सुधार करने की इच्छा रखता हु। 

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