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NPA (Non Performing Assets) के लिए जिम्मेदार कौन है? जनता, बैंक या सरकार ?

क्या आप जानते है की इस देश की जनता सबसे ज्यादा भरोसा किन बैंको पर करती है, बिलकुल आप जानते होंगे की सरकारी बैंको (सार्वजनिक क्षेत्र) पर. भारत में किसी का प्राइवेट बैंक में अकाउंट हो न हो पर सरकारी बैंक में जरुर होंगा, क्युकी देश की जनता सरकार पर, सरकार के कर्मचारियों व् अफसरों पर तथा इनकी संस्थायो पर ज्यादा विश्वास करते है. वही दूसरा सच NPA या बैंक घोटालो में ये भी निकल के आ रहा है की उसी जनता के साथ विश्वासघात हो रहा है, जानते है कैसे.

सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के बैंको को पैसे देती है, कर्मचारियों एवं अफसरों को मोटी से मोटी सैलरी देती है, बदले में ये सरकारी अफसर या कर्मचारी क्या देते है सिर्फ बैंक घाटा और NPA . अगर देखा जाये तो सबसे ज्यादा कस्टमर सरकारी बैंको के पास है प्राइवेट बैंक की तुलना में लेकिन सरकारी बेंक फिर भी घाटे में रहते है, सोचा है क्यों? जरुर सोचिये.

अभी हाल ही में पंजाब नेशनल बैंक में 11000 हज़ार करोड़ का सबसे बड़ा घोटाला हो गया जिसे नीरव मोदी घोटाला कहा जा रहा है और इस बैंक को पता ही नहीं चला, वही ये बैंक हर तिमाही में अपनी बैलेंस शीट बनाता है, ऑडिट करवाता है लेकिन फिर भी ये बात किसी की नज़र में नहीं आई क्यों,
अब आप ये सोचेंगे की आपको क्या फर्क पड़ता है, साहब बिलकुल फर्क पड़ता है. क्युकी ये वही सरकारी बैंक है जिनके कर्मचारियों एवं अफसरों को मोटी मोटी सैलरी मिलती है, किसलिए ? इसलिए की ये सरकार का या जनता का पैसा कही भी बाँट दे? मेरे हिसाब से इन बैंको को तो प्राइवेट बैंक से ज्यादा ईमानदार और जिम्मेदार होना चाहिए क्युकी देश की जनता इनपर ज्यादा विश्वास करती है.

क्रेडिट रेटिंग एजेंसी ने कहा है। की आईडीबीआई बैंक (कुल अग्रिम के 24.11 प्रतिशत के सकल एनपीए अनुपात के साथ) और इंडियन ओवरसीज बैंक (23.6 फीसदी) में एनपीए अनुपात 20 फीसदी से अधिक है पीएसबी में, इंडियन बैंक का न्यूनतम जीएनपीए अनुपात 7.21 फीसदी है,  केअर रेटिंग्स ने कहा कि वित्त वर्ष 18 के अप्रैल-जून तिमाही (क्यू 1) में 38 बैंकों के एक नमूने के एनपीए वर्ष-दर-वर्ष आधार पर 34.2 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ बढ़े हैं। इसके अलावा जून 2016 में एनपीए अनुपात 8.42 प्रतिशत से बढ़कर जून 2017 में 10.21 प्रतिशत हो गया जो पिछले छह तिमाहियों में सबसे ज्यादा है।
NPA (Non Performing Assets) in Hindi

NPA (Non Performing Assets) क्या है? 
अगर आज आप देखेंगे तो पता चलेगा की सबसे ज्यादा NPA (Non Performing Assets) हमारे PSU (public sector banks) सरकारी बैंको के पास है प्राइवेट बैंक की तुलना में. आप सोच रहे होंगे की NPA होता क्या है? इसका जवाब इसके नाम में ही छुपा है - NPA (Non Performing Assets) मतलब ऐसी रकम / कीमत जो परफॉर्म नहीं कर रही है मतलब बैंक के पास पैसा उनके एकाउंटिंग किताबो में है पर वास्तव में है ही नहीं है, क्युकी वो पैसा तो उन्होंने ऐसे लोगो को बाँट दिया जो वापस नहीं कर रहे या नहीं कर पा रहे है.

कौन है जो NPA (Non Performing Assets) बनाते है?

  1. NPA (Non Performing Assets) बनाने में सबसे बड़ा हाथ इस देश के ज्यादातर इज्जतदार उधोगपति लोग होते है जो अपने आप को इज्जतदार या पैसवाला समझते है और उधार के पैसे से ऐश या बिज़नस करते है. ये लोग प्राइवेट या सरकारी बैंको की नज़र में सबसे ज्यादा इज्जतदार या सम्माननीय लोग होते है. सरकारी बैंक या प्राइवेट बैंक इन लोगो से लोन के बदले जमानत लेने में शर्म कर करती है. या वेरिफिकेशन करने में शर्म करती है. क्युकी अगर इतना मोटा कस्टमर हाथ से निकल गया तो बैंक के अफसरों या कर्मचारियों का इंसेंटिव हाथ से निकल जायेगा. क्युकी उन्हें ऐसा लगता है जितना ज्यादा क़र्ज़ बैंक उन्हें देगा उतना ज्यादा बैंक व्याज वसूल कर कमा लेगा. पर उस पैसे के बदले उन्हें गारंटी लेने में शर्म लगती है.
  2. इसके बाद मिडिल क्लास के लोग आते है, जिन्हें हर बैंक शक़ की नजर से देखता है और सबसे ज्यादा वेरिफिकेशन इन्ही लोगो की होती है. पर इनमे कुछ लोग मजबूरी का शिकार होते है तो कुछ लोग वास्तव में वापस नहीं करना चाहते, पर ध्यान रहे 90 मिडिल क्लास के लोग मजबूरी का ही शिकार होने पर ही पैसे वापस नहीं कर पाते है. मान लो किसी मिडिल क्लास फॅमिली ने अपनी बेटी की शादी, घर बनाने के लिए, या बच्चो की पढाई के लिए लोन लिया और किसी कारणवश बैंक को वो पैसा नहीं लौटा पाते. कारण कुछ भी हो सकता है जैसे नौकरी का छूट जाना, जो कमाता है उसके साथ कुछ अनहोनी हो जाना आदि आदि.
  3. और लास्ट में आता है किसान जो बैंक की नज़र में बिलकुल इज्जतदार नहीं होता पर उसी इज्जत के लिए किसान आजादी से लेकर आज तक जान देता चला आ रहा है. वो ये वर्दाश्त नहीं कर पाते की जो उन्होंने बैंक से उधार लिया था वो पैसा वापस कर पाने में सक्षम नहीं है, और अब उसे गाँव या समाज के लोग क्या समझेंगे. कारण यहाँ भी वही हो सकते है जैसे फसल का अच्छा न होना जो उसकी जीविका या कमाई एकमात्र साधन होता है या घर में शादी या पढाई आदि आदि 
  4. और इसके बाद कुछ और भी छोटे मोटे कारक हो सकते है.


जब एक बार लोन ली हुयी रकम NPA घोषित कर दी जाती है तो बैंक SARFAESI Act के अंतर्गत लोन रिकवर करने के लिए कड़ा कदम उठा सकती है.

  • बैंक उस उधोगपति की प्रॉपर्टी (commercial, residential, fixed or moving) को बैंक बिना कोर्ट के आर्डर भी जब्त कर सकती है.
  • बैंक उस प्रॉपर्टी को Auction या Sale कर सकती है.
  • यदि उस उधोगपति ने किसी तीसरे को अपना प्रॉपर्टी पहले से ही बेच दिया है तो बैंक तीसरे इंसान से भी सारे प्रॉपर्टी ले सकती है.
  • यदि तीसरे खरीददार के पास उस उधोगपति के पैसे हैं तो बैंक उसे भी जब्त कर सकती है.
  • पर ध्यान रहे  SARFAESI के अंतर्गत 10 लाख तक के लोन का मामला ही आ सकता है.
  • SARFAESI एक्ट केवल उन परिसंपत्तियों पर ही लागू होता है जो ऋण प्राप्त करने के लिए “गिरवी / सुरक्षित” हों.
  • यदि किसी उधोगपति ने बैंक से बिज़नस के लिए लोन लिया है तो बैंक उसे अपने कारखाने / मशीनी / वाहनों / भूमि आदि को बंधक (mortgage) के रूप में रखने के लिए कहता है. क्युकी बैंक SARFAESI एक्ट के नाम पर उसके निजी घर-फर्नीचर, महँगी कलाई-घड़ी या उनके बेटे की साइकिल नहीं ले सकता है. खेती को भी SARFAESI act में शामिल नहीं किया गया है.


किस तरह के बैंको के पास सबसे ज्यादा NPA (Non Performing Assets) है?
जिन बैंको के पास सबसे ज्यादा NPA (Non Performing Assets) है इसका मतलब ये हो सकता है की इन बैंको ने उधार / क़र्ज़ देने में बिलकुल जिम्मेदारी नहीं दिखाई. हो सकता है की कुछ उधोगपतियो को वास्तव में किसी उधोग में नुकसान हुआ हो पर सभी को हो या इतने ज्यादा को हो ये समझ से बाहर है. बैंको को प्लान समझना चाहिए था. लेकिन जब बैंक के अफसर या कर्मचारी ही खुद किसी को कुछ रिश्वत के बदले क़र्ज़ दे तो फिर ये सारी बातें बेकार हो जाती है. चलिए एक बार देखते है की आज मतलब फ़रवरी २०१८ में किस तरह की बैंको के पास कितना NPA है. मैं चाहता तो हर बैंक का NPA यहाँ दिखा सकता था पर यहाँ में जो आकंडे दे रहा हु सिर्फ उदहारण के लिए, आपको बताने या समझाने के लिए. ज्यादा और सही जानकारी के लिए RBI की वेबसाइट पर देख सकते है .
Net NPAs
Banks
As on March 31
As on March 31
( previous year )
( current  year )
STATE BANK OF INDIA & ITS ASSOCIATES
688944
969322
NATIONALISED BANKS
2515681
2861567
PRIVATE SECTOR BANKS
266774
477802
FOREIGN BANKS
27619
21406
SMALL FINANCE BANKS 
457
1147
Bad बैंक क्या है?
Bad Banks एक आर्थिक अवधारणा है जिसके अंतर्गत आर्थिक संकट के समय घाटे में चल रहे बैंकों द्वारा अपनी देयताओं को एक नये बैंक को स्थानांतरित कर दिया जाता है। जब किसी बैंक की गैर निष्पादित संपत्ति (Non Performing Assets) सीमा से अधिक हो जाती है तब राज्य के आश्वासन पर एक ऐसे बैंक का निर्माण किया जाता है जो मुख्य बैंक की देयताओं को एक निश्चित समय के लिए धारण कर लेता है, १९९१-९२ के दौरान स्वीडन में इस तरह की प्रक्रिया द्वारा आर्थिक चुनौतियों का सामना किया गया था। 2012 में स्पेन ने आर्थिक संकट के दौरान ऐसे ही बैंकों का सहारा लिया है। इन Bad बैंकों को 10 से 15 वर्ष की समय सीमा दी गयी है। स्थानीय सरकार द्वारा इन बैंकों को निर्धारित अवधि में लाभ में लेकर आना होगा।

NPA (Non Performing Assets) से देश की अर्थ व्यवस्था पर प्रभाव ?
इसे हम ऐसे समझ सकते है की मान लो आपके पास 5 लाख रुपये है, उसमे से आपने अपने दोस्त को 4 लाख क़र्ज़ या उधार में दे दिए. फिर वो दोस्त आपके पैसे वापस नहीं कर रहा या नहीं कर पा रहा है. तो आपके पास कितने पैसे है 5 लाख या १ लाख. आप अपनी मन की शांति के लिए सोच सकते है की आपके पास 5 लाख रुपये लेकिन आप इस्तेमाल सिर्फ एक लाख ही कर सकते है, जो वास्तव में आपके पास है. वही हमारे देश की स्थिति होती है की नाम के लिए देश के बैंको के पास रुपये है, लेकिन वो पहले से ही चुरा लिए गए है. मन की शांति के लिए कुछ भी कह लो.


सरकार क्या कर सकती है?
मेरे हिसाब से सरकार को इन public sector बैंको को प्राइवेट हाथो में बेंच देना चाहिए, इससे बैंक प्राइवेट बैंको की तरह अच्छे से काम करेंगे और देश की अर्थ व्यवस्था ख़राब नहीं होगी. क्युकी प्राइवेट बैंक अपने टारगेट के हिसाब से काम करते है/.

जनता को क्या करना चाहिए ?
जनता को चाहिए की उन बैंको में पैसे न रखे (फिक्स्ड डेपोजीट या किसी भी रूप में) जिनका NPA ज्यादा है क्युकी इसका मतलब ये है की कही न कही उस ज्यादा NPA के लिए बैंक भी जिम्मेदार है और आपके मेहनत के पैसे को कही भी उड़ा सकता है. अगर कही कोई बैंक दिवालिया हो गया तो आपकी जिंदगी भर की कमाई चली जाएगी जिसका हर्जाना सरकार भी नहीं देगी.

तो अब आपको समझ में आ गया होगा की NPA के लिए जितना लोन लेने वाले लोग जिम्मेदार है उतना ही लोन देने वाले बैंक या उनके कर्मचारी. साथ ही साथ सरकार को विदेशो से सीख लेकर कोई न कोई रास्ता निकालना चाहिए - जैसे लोन की एक अधिकतम सीमा हो जैसे 50 करोड़ या 100 करोड़ या 500 करोड़. ऐसा नहीं होना चाहिए की कोई 11000 करोड़ का कोई लोन ले ले और वापस न करे क्युकी ये तो समझ से बाहर है.


ध्यान रखे : इस लेख को केवल जानकारी के तौर पर ले, हम आपको कोई सुझाव या एडवाइस नहीं दे रहे. न ही इसका कही कानूनी प्रक्रिया में इस्तेमाल करे. ये सिर्फ लेखक की अपनी समझ है. अगर जानकारी में कुछ त्रुटी हो तो जरुर बताये हम सुधार करने में विश्वास रखते है.

Guest Post क्या है इसके फायदे एवं नुकसान - इन्टरनेट मार्केटिंग

What are the advantages and disadvantages of Guest Post - Internet Marketing

नमस्कार दोस्तों !! आज बात करते है Guest Post के बारे में और जानते है की कैसे Guest Post एक ब्लॉगर के लिए, एक ब्रांड या नयी वेबसाइट के लिए और कैसे एक विजिटर के लिए लाभ का काम करती है. आप कोई भी न्यूज़ पेपर उठा कर देख लो उसमे हर रोज़ कोई न कोई ऐसा टॉपिक जरुर होता है जिसमे वो न्यूज़ पेपर जानकारी के साथ साथ किसी ब्रांड के प्रोडक्ट या सर्विसेज को खरीदने के लिए प्रेरित करता है. कुछ नहीं तो जिसने भी वो टॉपिक लिखा है उसका नाम और कांटेक्ट जानकारी लिखी होगी. मतलब वो व्यक्ति अपने आप को प्रमोट करना चाहता है. आदि आदि .
 What are the advantages and disadvantages of Guest Post - Internet Marketing


सबसे पहले जानते है उनके लिए फायदे जो नए ब्लॉगर है, या वो मार्किट में नया ब्रांड है, या उनकी कोई नयी वेबसाइट या ब्लॉग है:

मान लीजिये आप की नयी वेबसाइट है या ब्लॉग है तो उस वेबसाइट पर ज्यादा से ज्यादा लोग कैसे पहुंचाए क्युकी ये बात सभी को पता है की इन्टरनेट पर ज्यादातर जानकारी (मान लो 99%) फ्री में मिलती है, बस इन्टरनेट पर कुछ धंधा होता है तो वो कोई प्रोडक्ट या कोई सर्विसेज का. जिसे आप जानकारी देने के साथ साथ विजिटर को बताते है की कैसे ये उसके लिए useful हो सकता है फिर ये उसकी मर्ज़ी है की वो उसे ख़रीदे या नहीं. आपने ईमानदारी से अपना काम कर दिया की आपने जानकारी के साथ साथ अपने प्रोडक्ट या सर्विसेज के बारे में विजिटर को बता दिया. क्युकी किसी भी जानकारी को कितने लोगो तक पहुचाया या कितने लोगो तक कैसे पहुचना है ये आपका काम है. जिसमे Guest Posting आपके लिए प्रमुखता से काम करती है.

तो कैसे चुने Guest Post का टॉपिक? :
Guest Post का टॉपिक हमेशा आपसे (आपकी सर्विसेज या प्रोडक्ट) से सम्बंधित ही होगा, क्युकी उसके बारे में आपका ज्यादा से ज्यादा जानकारी है. मान लो आपका Education से सम्बंधित ब्लॉग या वेबसाइट है तो आप Education (शिक्षा) से सम्बंधित ही Guest Post लिखेंगे. जो भी टॉपिक चुने वो विजिटर (पढ़ने वाले) के हर प्रश्न का जवाव होना चाहिए. आप चाहे तो उन प्रश्नों के छोटे छोटे शीर्षक (headline) बना कर लिख सकते है. जिससे की पढने वाले को आपकी बात समझ आ जाये और उसके मन में उस टॉपिक से सम्बंधित कम से कम प्रश्न रह जाये.

आवश्यक निर्देश : Guest Post में दी गयी जानकारी आपकी अपनी ख़ोज पर आधारित होनी चाहिए. न किसी और की मेहनत को नक़ल करके लिखे. क्युकी इससे आपकी Guest Post रिजेक्ट हो सकती है और आपकी मेहनत बेकार जा सकती है. नक़ल किया गया डाटा ज्यादातर सर्च engine (Google, Yahoo, Bing ) आदि को पता चल जाता है और उस पोस्ट को उनके द्वारा बैन किया जा सकता है. मतलब Google में सर्च नहीं होगा.


Guest Post को किस तरह की वेबसाइट या ब्लॉग पर प्रकाशित करना चाहिए? :
यहाँ ऊपर जो मैंने उदहारण दिया है वो ये मानकर दिया है की आपके पास जो भी ब्लॉग वेबसाइट, ब्लॉग या सर्विसेज है. तो सीधी सी बात है की आपने जो Guest Post लिखी होगी वो इसी से सम्बंधित ही होगी. अब उस Guest Post को उसी से सम्बंधित वेबसाइट पर पब्लिश करे क्युकी आपको अपने मतलब के विजिटरस को टारगेट करना है. इससे आपकी वेबसाइट पर ट्रैफिक मतलब विजिटरस की संख्या बढेगी और उनमे से कुछ आपकी सर्विस या प्रोडक्ट में रूचि में दिखायेगे.


Guest Post का फायदा उनके लिए जो पहले से ही ब्लॉग चला रहे है:
आप अगर अपने ब्लॉग या वेबसाइट पर Guest Post का आप्शन रखते है तो आपको हर रोज़ नया नया कंटेंट मिलेगा, और आपके वेबसाइट या ब्लॉग पर पहले से ज्यादा इनफार्मेशन या जानकारी उपलव्ध होगी. पर ध्यान रहे आपको वही Guest Post पब्लिश करनी है जो आपकी शर्तो पर खरी उतरती हो. वो शर्ते आपको अपने ब्लॉग या वेबसाइट ही हिसाब से बनानी होगी. मतलब आप किन किन टॉपिक्स को पब्लिश करते है. पोस्ट कितनी बड़ी और कैसी होनी चाहिए आदि आदि.

विजिटरस का Guest Post से फायदा:
ऑनलाइन विजिटरस का एक ही फायदा है की उसे आपके ब्लॉग से ज्यादा से ज्यादा जानकारी उसी टॉपिक से सम्बंधित आसानी से मिल जाती है, और अगर उसे कोई प्रोडक्ट या सर्विसेज चाहिए तो उसे उदहारण या आप्शन मिल जाते है, वजाय यहाँ वहां ख़ोज करने के.


Guest Post से होने वाली कुछ समस्याएं :
Guest Post से आपको समस्या हो सकती है अगर प्रकाशित पोस्ट पर जानकारी अधूरी है, जानकारी कही से कॉपी की गयी है, जानकारी आपके ब्लॉग से भिन्न है. क्युकी वो विजिटर को कंफ्यूज या भ्रमित करती है और वो आपकी ब्लॉग या वेबसाइट को बंद कर देंगा.
Guest Post में एक से ज्यादा back-link नहीं होने चाहिए, ये वो लिनक्स (URLs) sponosored नहीं होने चाहिए. कुछ लोग थर्ड पार्टी के link डाल देते है थोड़ी सी कमाई के लिए, और जैसे ही आपका विजिटर क्लिक करता है वो advertisements से भरी हुयी webpage पर पहुच जाता है. जिससे विजिटर irritate हो जाता है. और अगली बार आपके ब्लॉग या वेबसाइट पर आने से पहले सोचेगा या डरेगा.

अगर आप भी अपना कोई पोस्ट जो की आपकी वेबसाइट, ब्लॉग, प्रोडक्ट या सर्विस से सम्बंधित हो तो जरुर हमें भेजे - शर्तो व् जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करे.

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Indian Overseas Bank missed call balance enquiry number


Indian Overseas Bank missed call balance enquiry number

If you have saving or current bank account in Indian Overseas Bank then you can also use this facility to get bank statement and bank balance enquiry by Indian Overseas Bank missed call number.

If you want to check others bank account information then you can visit here.

Here is complete procedure to get Bank account balance by missed call.

Indian Overseas Bank missed call balance enquiry number

Dial the number- 04442220004 using your registered mobile number. After a few rings, the call will get cut automatically. The Bank will then respond with account balance details via SMS.

But please make sure that your mobile number should registered with the Indian Overseas bank (IOB Bank) if not registered then Visit any nearest IOB branch and get your Mobile Number registered for Mobile banking.

By SMS:
Now you can check account balance, get Mini statement, and get your MMID, to avail this facility, send an SMS with the specified keyword to the SMS Banking number to 84240 22122

For Indian Overseas Balance enquiry:
 BAL /space/ last 4 digit Account Number
e.g: BAL 1234  

For Indian Overseas Mini Statement:
MINI /space/ last 4 digit Account Number
e.g: MINI 1234

To get your MMID:
MMID

So you can track your accounts, round the clock, and this facilities available by sending keyword (Predefined formats according to services) through SMS to 84240 22122.

Indian Overseas Bank Customer Care Numbers :

Indian Overseas Bank Credit Card Toll Free Number : 18004257744
Customers can contact IOB’s credit card division at 044-28519573/9574/9575. This is available only on working days between 10 am to 6 pm.
For any other queries, one can contact their national toll free number at 18004254445.
Indian Overseas Bank Toll-Free Number: 1800-425-4445
Indian Overseas Bank Toll-Free Number (complaints against corruption): 1800-425-3402


If you want to know all banks missed call balance enquiry numbers then you can visit here.



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Intraday Trading और Delivery Trading में जाने आपके लिए क्या सही है ? - Business

Know which method is better for you in share market - Simply comare Intraday vs delivery Trading.


By - Pradeep Tomar / New Delhi
देखिये सबसे पहले आपको इन दोनों का मतलब समझना जरुरी है, तो सबसे पहले दोनों के अपने अपने फायदे और अपने अपने नुकसान समझते है फिर आप अपने आप फैसला कर सकेंगे की आपके लिए क्या अधिक सही है. क्युकी ज्यादातर ब्रोकिंग कंपनिया आपको Intraday में trading करने के लिए प्रेरित करती है क्युकी इसमें उन्हें हर दिन ब्रोकरेज मिलती है. बाकी आप नीचे दी गयी जानकारी को पढ़कर स्वयं फैसला ले.

तो सबसे पहले जानते है इंट्राडे ट्रेडिंग (Intraday Trading) के बारे में:

1. Intraday ट्रेडिंग में आप कोई भी शेयर खरीदते है तो आपको उस शेयर को उसी दिन बेचना भी पड़ेगा चाहे आपको लाभ हो या हानि.
उदहारण के लिए : आपने XYZ कंपनी के 1000 शेयर 50 रुपये में सुबह ख़रीदे क्युकी कंपनी ने आपको एक्सट्रा  मार्जिन मनी (क्रेडिट) दे रखा है और अगर शाम तक शेयर 50 रुपये से एक भी रुपये ऊपर गया तो आप लाभ कमा सकते है अर्थात जितना ऊपर जायेगा उतना आप (1000 X जितना ऊपर गया) लाभ कमा पायेगे. और अगर वही शेयर ऊपर जाने के वजाय नीचे गया तो आप उतना ही आप अपना नुकसान कर बैठेंगे. उस नुक्सान के साथ ही साथ आपको ट्रेडिंग की फुल वैल्यू पर ब्रोकरेज फीस / ट्रेडिंग फीस और टैक्स भी देना पड़ेगा. क्युकी intraday की वैलिडिटी सिर्फ एक दिन की ही होती है.

2. intraday ट्रेडिंग में ब्रोकिंग कंपनी आपको 20 गुना से लेकर 40-50 गुना आपकी जमा की गयी राशी का मार्जिन मनी (क्रेडिट) देती है जिससे आप ज्यादा शेयर खरीद कर ज्यादा लाभ कमा सकते है ये हर ब्रोकरेज कंपनी का अपना अलग अलग होता है जैसे Angel Broking Trading Co. अपने ट्रेडर्स को 40 गुना क्रेडिट मनी देती है.
उदहारण के लिए : आपने अपने ट्रेडिंग अकाउंट में 10000 रुपये ट्रान्सफर किये तो आप 10000 X 40 = 400000 तक की intraday ट्रेडिंग कर सकते है या शेयर खरीद सकते है. मतलब आप कम रुपये में भी ज्यादा की खरीदारी करके ज्यादा लाभ या हानि कर सकते है जो की आपको सिर्फ उसी एक दिन में करना है क्युकी शाम को शेयर मार्किट बंद होने से पहले ये मार्जिन मनी  (क्रेडिट) वापस करना होता है.

3. intraday शेयर में आपने जो भी शेयर ख़रीदे है उन्हें आपको लाभ या हानि किसी भी स्थिति में शाम तक बेचना होता है नहीं तो वो auto squre off हो जाते है. मतलब अपने आप बिक जायेंगे.

4. intraday में T2T (Trade to Trade segment) के अंतर्गत आने वाले शेयरस को नहीं खरीद सकते क्युकी ये वो शेयर्स होते है जिनमे ज्यादा रिस्क या कुछ सिक्यूरिटी प्रोब्लम्स होती है. इन शेयर्स में आप intraday में ट्रेडिंग नहीं कर सकते पर आप डिलीवरी ले सकते है जिसके लिए आपको उसका पूरा का पूरा भुगतान करना पड़ेगा.

5. intraday ट्रेडिंग में आपको बहुत ज्यादा लाभ या बहुत ज्यादा हानि कर सकते है. मतलब रिस्क डिलीवरी ट्रेडिंग से बहुत ज्यादा होता है.
6. इंट्राडे ट्रेडिंग (intraday Trading) में आप कम पैसो में भी ज्यादा मुनाफा कमा सकते है.
7. इंट्राडे ट्रेडिंग (intraday Trading) में आप लम्बे समय का इन्वेस्टमेंट नहीं कर सकते.
8. Intraday Trading charges ya Brokerage Charges कम होते है अगर डिलीवरी ट्रेडिंग से तुलना करो तो. आप अपने ब्रोकर से इसकी जानकारी जरुर ले.

चलिए अब जानते है डिलीवरी (Delivery Trading) ट्रेडिंग के बारे में:

1. अगर आप शेयर को खरीदते समय डिलीवरी (Delivery Trading ) का आप्शन चुनते है तो आपको वैलिडिटी वाली समस्या नहीं होगी, मतलब शेयर की डिलीवरी मिलने के बाद उसे कभी भी बेंच सकते है, ज्यादातर लोग 2-10 में बेंच कर लाभ कमा लेते है, आप चाहे तो दीर्घकाल रखकर सही समय पर बेंच सकते है.

2. डिलीवरी ट्रेडिंग करने के लिए ज्यादातर ब्रोकिंग कंपनियां आपको क्रेडिट मनी न के बराबर या नहीं देती है. मतलब आपके पास अगर 10000 रुपये है तो आप इसी वैल्यू के शेयर्स खरीद कर रख सकते है.

3. डिलीवरी ट्रेडिंग में ख़रीदे गये शेयर को आप कभी भी बेंच सकते है जब भी आपको लगे की आपको लाभ मिल रहा है .
4. डिलीवरी ट्रेडिंग ( Delivery Trading ) में T2T (Trade to Trade segment) के अंतर्गत आने वाले शेयरस को भी खरीद सकते है लेकिन खरीदने से पहले उनके रिस्क के बारे में जरुर पता कर ले.
5. ऐसा नहीं है की डिलीवरी ट्रेडिंग ( Delivery Trading ) में रिस्क नहीं होता पर intraday से कम होता है मतलब कम रिस्क कम लाभ-हानि, ज्यादा रिस्क मतलब ज्यादा लाभ-हानि की स्थिति रहती है.
6. डिलीवरी ट्रेडिंग ( Delivery Trading ) में आपके पास जितना इन्वेस्टमेंट होगा उतने का ही व्यापार कर सकते है.
7. डिलीवरी ट्रेडिंग ( Delivery Trading ) में आप लम्बे या छोटे समय तक का इन्वेस्टमेंट कर सकते है.
8. Delivery Trading charges ज्यादा होते है अगर intraday से तुलना करो तो. आप अपने ब्रोकर कंपनी  से इसकी जानकारी जरुर ले.
intraday vs delivery Trading में जाने आपके लिए क्या सही है ? - Share Market

इंट्राडे ट्रेडिंग v / s डिलिवरी ट्रेडिंग - Intraday vs Delivery Trading :

यह निष्कर्ष करना आसान है कि इंट्राडे ट्रेडिंग आमतौर पर एक दिन में पूरी हो जाती है। इसका विशेष रूप से मतलब है कि दिन में खरीदे गए सभी शेयरों को बाजार के बंद होने से पहले, दिन के अंत तक बेचा जाना चाहिए। अगर इन शेयरों को नहीं बेचा जाता है, तो वे अपने आप बिक जाते है उस समय पर जो भी उसका रेट हो.

हालांकि, दूसरी तरफ, डिलीवरी आधारित व्यापार में, उच्च लाभ रिटर्न के लिए खरीदी गई शेयर लंबी अवधि के लिए बनाए रखा जा सकता है।

जबकि इंट्राडे ट्रेडिंग कम पूंजी में ही और ब्रोकिंग कंपनी आपको एक्सट्रा मार्जिन मनी देता है, मतलब आप उधार के पैसो से ज्यादा शेयर खरीद कर अपना लाभ लेकर उन पैसो को वापस करना होता है. वही डिलीवरी ट्रेडिंग के लिए इसके लेनदेन के लिए पूरी रकम की आवश्यकता होती है।

तो अब ये आप पर निर्भर करता है की आप कम पैसो में ज्यादा लाभ या हानि लेना चाहते है या जितने आपके पास पैसे है उन्हें से लाभ या हानि लेना चाहते है.

अगर आपको ये लेख अच्छा लगा तो हमें जरुर बताये ताकि इससे सम्बंधित और जानकारी लिख सकू. आप अपने सवाल कमेंट बॉक्स में डाले. और हाँ इस जानकारी को अपने मित्रो के साथ फेसबुक या ट्विटर पर जरुर शेयर करे.

सावधान : शेयर मार्किट में किसी भी तरह इन्वेस्टमेंट बाजार के उतार चढाव पर निर्भर है कृपया बुद्धिमानी से काम ले.


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Central Bank of India Balance Enquiry or Mini Statement Number - Missed Call Enquiry Number

Central Bank of India Balance Enquiry or Mini Statement Number - Missed Call Enquiry Number

Please give the missed call from registered mobile number to the to the givel numbers. Central Bank Missed Call Service involves Banking by giving a Missed call to pre-defined mobile numbers. The facility is available for Savings / Current / Overdraft / Cash-credit accounts.
Central Bank of India Balance Enquiry or Mini Statement Number - Missed Call Enquiry Number
The service can be activated from branch for the mobile number that is registered with the Bank. Registration/Activation for service needs to be done from branch.

here are Pre-defined mobile numbers for Central Bank of India missed call enquiry services request:

Central Bank of India Balance Enquiry (09555244442)
Central Bank of India Mini Statement (09555144441)


Once the service is activated on mobile number:
Dial 09555244442 for Balance Enquiry: You can get the last ‘clear' balance on the account through SMS.
Dial 09555144441 for Mini Statement: You can get the Mini Statement i.e. last 3 transactions on the account through SMS.
Other Details:
It is mandatory that mobile number to be used for missed call service to be registered with bank. If not done, visit Home Branch and update mobile number.
You can register for Missed Call for multiple accounts also, Visit branch for multiple account registration.
Missed Call Service is currently available for SB/CA/OD/CC accounts only. to know other Bank Account missed call number from here


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Canara Bank Balance Check by missed call & Customer Care Number

Canara Bank Balance Check by missed call & Customer Care Number

Canara Bank is India's well known National bank of India. Canara Bank is offering its banking service to all over India. If you have account in Canara Bank then you can check your  Canara Bank account balance and mini statements within few minutes.

Here is information all which you can use for Canara Bank banking:
Sl. No.
Missed Call Alert Number
Service
1
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Canara Bank Balance Check by missed call & Customer Care Number

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For any information you can reach Canara Bank customer care

Here is Canara Bank Customer Care Toll Free Number :
1800 425 0018


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